परमेश्वर कबीर साहेब जी सतलोक से चारों युगों में सशरीर आते हैं और हमें अपना ज्ञान बताकर सशरीर चले जाते हैं।
परन्तु हम भगवान को पहचान नहीं पाते है।
कबीर साहेब जी अविनाशी परमात्मा है जो कि कभी मां से जन्म नहीं लेते है।
उसी तरह जेष्ठ मास पूर्णमासी को कबीर साहेब जी यहां 622 साल पहले काशी (उत्तरप्रदेश) लहरतारा तालाब पर शिशु के रुप में फूल पर प्रकट हुए थे।
स्नान करने के
लिए गए नीरू-नीमा नामक जुलाहा दम्पत्ति को प्राप्त
हुए।
फिर कबीर साहेब जी छोटी आयु में ही अनेकों चमत्कार किये।
और फिर 104 वर्ष के स्वामी रामानंद जी को सही और पूर्ण ज्ञान समझाया और सतलोक जहां जाने के बाद जन्म मृत्यु के रोग से मुक्ति मिल जाती है।
उस स्थान के बारे में बताया और सतलोक दिखाया।
इस तरह कबीर परमेश्वर जी से जो भी व्यक्ति नाम दीक्षा लेता तो उनको बहुत लाभ मिलने लगा।
इस तरह चौंसठ लाख शिष्य हुए।
इसी तरह कबीर परमेश्वर जी को मारने के लिए अनेकों अत्याचार किए गए लेकिन वे नहीं मरे क्योंकि वे अविनाशी परमात्मा थे।
कबीर साहेब जी के अलावा सब नाशवान है। और यही हमारे पवित्र शास्त्रों में प्रमाण है।
कबीर परमेश्वर जी का मूल स्थान सतलोक है जहां पर प्राणी की जन्म मृत्यु नहीं होती है।
हम भी वही रहते थे लेकिन गलती से काल के साथ आ गये।
यहां पर सब नाशवान है।
इसलिए भगवान को चाहने वालों भगवान को पहचानों।
आज कबीर परमेश्वर स्वयं संत रामपाल जी महाराज के रूप में लीला कर रहे हैं और मोक्ष का रास्ता बता रहे हैं।
वो हमारे शास्त्रों के अनुसार प्रमाणित।
इसलिए आप सभी उनसे नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाएं।
परन्तु हम भगवान को पहचान नहीं पाते है।
कबीर साहेब जी अविनाशी परमात्मा है जो कि कभी मां से जन्म नहीं लेते है।
उसी तरह जेष्ठ मास पूर्णमासी को कबीर साहेब जी यहां 622 साल पहले काशी (उत्तरप्रदेश) लहरतारा तालाब पर शिशु के रुप में फूल पर प्रकट हुए थे।
स्नान करने के
लिए गए नीरू-नीमा नामक जुलाहा दम्पत्ति को प्राप्त
हुए।
फिर कबीर साहेब जी छोटी आयु में ही अनेकों चमत्कार किये।
और फिर 104 वर्ष के स्वामी रामानंद जी को सही और पूर्ण ज्ञान समझाया और सतलोक जहां जाने के बाद जन्म मृत्यु के रोग से मुक्ति मिल जाती है।
उस स्थान के बारे में बताया और सतलोक दिखाया।
इस तरह कबीर परमेश्वर जी से जो भी व्यक्ति नाम दीक्षा लेता तो उनको बहुत लाभ मिलने लगा।
इस तरह चौंसठ लाख शिष्य हुए।
इसी तरह कबीर परमेश्वर जी को मारने के लिए अनेकों अत्याचार किए गए लेकिन वे नहीं मरे क्योंकि वे अविनाशी परमात्मा थे।
कबीर साहेब जी के अलावा सब नाशवान है। और यही हमारे पवित्र शास्त्रों में प्रमाण है।
कबीर परमेश्वर जी का मूल स्थान सतलोक है जहां पर प्राणी की जन्म मृत्यु नहीं होती है।
हम भी वही रहते थे लेकिन गलती से काल के साथ आ गये।
यहां पर सब नाशवान है।
इसलिए भगवान को चाहने वालों भगवान को पहचानों।
आज कबीर परमेश्वर स्वयं संत रामपाल जी महाराज के रूप में लीला कर रहे हैं और मोक्ष का रास्ता बता रहे हैं।
वो हमारे शास्त्रों के अनुसार प्रमाणित।
इसलिए आप सभी उनसे नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाएं।



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